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सस्ते आयात पर नियंत्रण नहीं लगाएगा इस्पात मंत्रालय, मिलों की अपील अनसुनी
भारतीय इस्पात उद्योग सरकार से सीमा शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन मंत्रालय आयात पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार नहीं है। दिसंबर में तीन साल के लिए कुछ ग्रेड के इस्पात पर टैरिफ लगाए जाने के बाद भी आयात में वृद्धि जारी है।
LSN India ·

नई दिल्ली में इस्पात उद्योग के प्रतिनिधियों की बार-बार की अपीलों के बावजूद केंद्रीय इस्पात मंत्रालय सस्ते आयात पर नई पाबंदियां लगाने की दिशा में कदम उठाने में अनिच्छुक दिख रहा है। घरेलू इस्पात निर्माताओं का मानना है कि विदेशी प्रतियोगिता से उन्हें बचाने के लिए सख्त उपाय जरूरी हैं।
गत दिसंबर में भारत सरकार ने इस्पात की कुछ किस्मों के आयात पर तीन साल की अवधि के लिए आयात शुल्क लगाया था। इस कदम का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को बाजार में सुरक्षा देना था। हालांकि, इस उपाय के लागू होने के बाद भी विदेशी इस्पात का आयात कम नहीं हुआ है और उल्टे इसमें वृद्धि देखी जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ के बावजूद आयात में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के मजबूत होने और निर्माण गतिविधियों में तेजी से संबंधित है। घरेलू उत्पादन क्षमता की तुलना में वैश्विक बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध इस्पात आयातकारियों के लिए अधिक आकर्षक बना हुआ है।
इस्पात उद्योग के शीर्ष निर्माताओं ने सरकार से आयात पर अतिरिक्त संरक्षण उपाय अपनाने का आग्रह किया है, लेकिन नीति निर्माता इस समय ऐसे कदमों से बचना पसंद कर रहे हैं। सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अर्थव्यवस्था की विविध जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आयात के प्रवाह को पूरी तरह बाधित करना व्यावहारिक नहीं है।