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केशम द्वीप: ईरान-अमेरिका संघर्ष का केंद्रीय बिंदु क्यों?

अमेरिका के हमलों का केंद्र बना केशम द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। फारस की खाड़ी में इसकी रणनीतिक स्थिति इसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बनाती है।

LSN India · 3 November 2026

केशम द्वीप: ईरान-अमेरिका संघर्ष का केंद्रीय बिंदु क्यों?

ईरान के केशम द्वीप को लेकर अमेरिका और तेहरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह द्वीप ईरान का सबसे विशाल द्वीप होने के साथ ही भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दक्षिण में स्थित इस द्वीप से होमुर्ज जलडमरूमध्य पर सीधी नजर रखी जा सकती है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है।

होमुर्ज जलडमरूमध्य से दैनिक आधार पर लाखों बैरल कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस का व्यापार होता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के एक तिहाई से अधिक हिस्से के लिए यह जलमार्ग अपरिहार्य है। इस वजह से इस क्षेत्र पर नियंत्रण पाना भूराजनीतिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

केशम द्वीप की सामरिक अहमियत इसी कारण वर्षों से अमेरिका और ईरान के बीच विवाद का विषय रहा है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को लेकर सचेत रहता है, जबकि ईरान इसे अपने हितों के लिए रक्षा करने का प्रयास करता है। द्वीप पर की जाने वाली कार्रवाइयां न केवल क्षेत्रीय संघर्ष को दर्शाती हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रतिबिंबित करती हैं।

इस द्वीप के महत्व को समझना अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा नीति के आपस के संबंध को समझने के लिए आवश्यक है। मध्य पूर्व में हो रहे भू-राजनीतिक परिवर्तन और शक्ति संतुलन के संदर्भ में केशम द्वीप एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।