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अनुसूचित जाति-जनजाति योजना निधि की निगरानी को मजबूत करने की जरूरत
विशेषज्ञों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित सरकारी धन सही लाभार्थियों तक पहुंचने को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी निरीक्षण व्यवस्था की मांग की है। वर्तमान में धन के दुरुपयोग और लक्ष्य भटकाव की समस्या बनी हुई है।
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अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए आवंटित सरकारी निधि को सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था के तहत लाना आवश्यक है। विभिन्न विकास योजनाओं के तहत आवंटित इस राशि को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाने में काफी चुनौतियां आ रही हैं।
प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार के कारण कई बार यह निधि उद्देश्य से भटक जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी जवाबदेही व्यवस्था नहीं होगी, तब तक कमजोर वर्गों को मिलने वाले लाभ सीमित रहेंगे।
प्रभावी निरीक्षण के लिए जिला और तहसील स्तर पर नियमित ऑडिट, सार्वजनिक सूचना प्रणाली और समुदाय की भागीदारी बढ़ानी होगी। इसके अलावा, लाभार्थी चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल माध्यम से निधि वितरण, समय-समय पर प्रभाव मूल्यांकन और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने से योजनाओं की प्रभावशीलता में वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल लाभार्थियों तक धन सही तरीके से पहुंचेगा, बल्कि सामाजिक न्याय के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।