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JEE Advanced के दो अटेंप्ट से वंचित छात्र, नीति बदलाव की मांग
झारखंड के एक छात्र ने JEE Advanced परीक्षा के मौजूदा नियमों की सीमाओं को उजागर किया है, जहां गरीब परिवारों के बच्चे सीमित प्रयासों में अपनी योग्यता साबित नहीं कर पाते। नीति निर्माताओं से अधिक अवसर देने की अपील की जा रही है।
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भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश का द्वार JEE Advanced परीक्षा है, लेकिन इसके लिए निर्धारित नियम हाशिये पर रहने वाले परिवारों के छात्रों के लिए गंभीर बाधा बन गए हैं। मौजूदा नियमानुसार, किसी भी छात्र को दो वर्षों में अधिकतम दो ही बार JEE Advanced परीक्षा देने का अवसर दिया जाता है।
यह सीमा उन छात्रों के लिए विशेष रूप से कठोर साबित हो रही है जिनके पास महंगी कोचिंग सुविधाओं या अन्य संसाधनों तक पहुंच नहीं है। सामान्य परिवारों का एक बच्चा अपनी तैयारी पूरी करते हुए दोनों प्रयास समाप्त कर देता है, जबकि शहरी संपन्न छात्रों के पास अतिरिक्त संसाधन और निर्देशन होता है।
झारखंड के एक छात्र ने अपनी व्यक्तिगत पीड़ा के माध्यम से इसी समस्या को रेखांकित किया है। उसका मानना है कि IIT जैसे संस्थानों में प्रवेश उसकी जिंदगी बदल सकता है, लेकिन सरकार को अतिरिक्त प्रयास के अवसर देने चाहिए। उसकी यह आवाज शिक्षा नीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को दर्शाती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि JEE Advanced नियमों में संशोधन से वंचित वर्गों के प्रतिभाशाली छात्रों को समान अवसर मिल सकते हैं। इस दिशा में नीति निर्माताओं से अपेक्षा की जा रही है कि वे व्यावहारिक सुधार पर विचार करें और सभी वर्गों के योग्य छात्रों को प्रतिभा दिखाने का पर्याप्त मौका दें।