World · India Bureau
सर्बिया: छात्र आंदोलन की जीत, वुसिक की सत्ता से बाहरी
सर्बिया में हुए चुनावों में दशकों से सत्ता में रहने वाले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक को करारी हार का सामना करना पड़ा है। दो वर्षों से चले आ रहे छात्र प्रदर्शनों के दबाव में मतदाताओं ने राजनीतिक परिवर्तन का संदेश दिया।
LSN India ·

सर्बिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहां पुतिन समर्थक माने जाने वाले राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक को चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। विरोधी गठबंधन के नेतृत्व में छात्र कार्यकर्ताओं ने संसद में बहुमत हासिल किया है, जो सर्बिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
पिछले दो वर्षों से सर्बिया में छात्र-नेतृत्व वाला आंदोलन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा था। इस आंदोलन ने देश में राजनीतिक सुधार और सत्ता में परिवर्तन की मांग को केंद्रीय मुद्दा बनाया था। मतदाताओं की प्रतिक्रिया से लगता है कि जनता ने इन मांगों को स्वीकार किया है।
वुसिक के शासनकाल में सर्बिया की बाहरी नीति मुख्यतः रूस के करीब रही मानी जाती थी। इस चुनावी बदलाव से यूरोपीय संघ और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सर्बिया की स्थिति में संभावित बदलाव हो सकता है।
छात्र आंदोलन की इस जीत को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में युवाओं की सक्रिय भूमिका और राजनीतिक जागरूकता का परिणाम माना जा रहा है। आने वाले समय में नई सरकार किन नीतियों को अपनाती है, यह न केवल सर्बिया के लिए बल्कि पूरे बाल्कन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगा।