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भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के पीछे कचरे और जानबूझकर खिलाने का हाथ
एक अध्ययन में सामने आया है कि भारत में आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि के लिए कचरे से मिलने वाले खाद्य पदार्थों और लोगों द्वारा जानबूझकर दिया जाने वाला भोजन मुख्य कारण है। अनुमानित भोजन की उपलब्धता इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
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भारत में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी एक जटिल समस्या बनी हुई है जिसके पीछे शहरी इलाकों में खाद्य पदार्थों की आसान उपलब्धता मुख्य भूमिका निभा रही है। हाल के अध्ययन से पता चलता है कि कचरे के ढेर से मिलने वाला भोजन और स्थानीय समुदायों द्वारा जानबूझकर दिया जाने वाला खाना इन जानवरों की आबादी को स्थिर और बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, जब आवारा कुत्तों को नियमित और पूर्वानुमानित तरीके से भोजन मिलता है, तो वह पास-पास के इलाकों में अपनी आबादी बनाए रखते हैं। कचरा प्रबंधन की अपर्याप्त व्यवस्था और कुछ निवासियों की सहानुभूति जनित खिलाने की प्रथा दोनों ही इस स्थिति को बढ़ावा दे रहे हैं।
यह अध्ययन इंगित करता है कि आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए केवल पशु नियंत्रण उपाय काफी नहीं हैं। शहरों में बेहतर कचरा प्रबंधन और समुदाय को जागरूकता प्रोग्राम के माध्यम से खिलाने की प्रथा पर नियंत्रण आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की उपलब्धता को नियंत्रित करने से आवारा कुत्तों की आबादी को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए नगरपालिका प्राधिकरणों, पशु कल्याण संगठनों और समाज के बीच समन्वित प्रयास की आवश्यकता है।