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चीनी मिलें खुदरा दामों में गिरावट को लेकर सवाल उठा रही हैं
चीनी मिलें कहती हैं कि खुदरा कीमतें तेजी से गिरनी चाहिए थीं क्योंकि मिल से निकलने वाली कीमत अगस्त के शिखर से लगभग 30 प्रतिशत गिरी है। बाजार में कोई कमी नहीं बताई जा रही है।
LSN India ·

देश की चीनी मिलें खुदरा बाजार में कीमतों की गिरावट को लेकर सवाल उठा रही हैं, जो उनकी माने तो उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है। अगस्त के उच्चतम स्तर से मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन यह बदलाव अभी तक खुदरा विक्रेताओं द्वारा उपभोक्ता स्तर पर पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं हुआ है।
चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों का तर्क है कि थोक कीमतों में आई तेजी से गिरावट के अनुसार खुदरा दामों में भी तेजी से कमी आनी चाहिए थी। उद्योग के अनुसार वर्तमान में बाजार में चीनी की कोई कमी नहीं है, जिससे कीमतों में अधिक लचीलापन आना चाहिए।
मिलों का मानना है कि इस असंगति से उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है और वितरण श्रृंखला में मध्यस्थी अत्यधिक लाभ ले रहे हैं। वे मानते हैं कि बाजार में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ने से थोक और खुदरा दामों के बीच का अंतर कम हो सकता है।
यह मुद्दा चीनी क्षेत्र में कीमत निर्धारण के तंत्र और बाजार दक्षता को लेकर व्यापक सवाल खड़े करता है। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि इस स्थिति में नियामकीय निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।