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चीनी की कीमतों में उछाल: उत्पादन में गिरावट और स्टॉकपाइलिंग जिम्मेदार
गन्ने के उत्पादन में कमी और व्यापारियों द्वारा स्टॉकपाइलिंग के कारण चीनी की कीमतें आसमान छू गई हैं। विशेषज्ञों ने इथेनॉल मिश्रण को इसका मुख्य कारण नहीं माना है।
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देश भर में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ढीली चीनी की कीमत 75-80 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, इस तीव्र मूल्य वृद्धि के पीछे कई कारण हैं, लेकिन पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की नीति इसका मुख्य कारण नहीं है।
विपक्षी दलों ने सरकार पर सरकारी इथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर हमला बोला है, यह दावा करते हुए कि यह नीति चीनी की कीमतों को बढ़ा रही है और आम जनता पर वित्तीय दबाव डाल रही है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि देश के पास घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक है।
महाराष्ट्र के पूर्व चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ सहित विशेषज्ञों ने कहा है कि चीनी की कीमतें मुख्य रूप से गन्ने के उत्पादन में गिरावट और व्यापारियों द्वारा भंडारण की रणनीति के कारण बढ़ी हैं। उत्पादन में कमी और स्टॉकपाइलिंग के इस संयोजन ने बाजार में कमी की स्थिति पैदा की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या की गहराई को समझने के लिए गन्ने की पैदावार और उत्पादन क्षमता पर नजर डालना जरूरी है। आने वाले समय में स्थिति में सुधार के लिए कृषि नीतियों और बाजार विनियमन पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।