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गन्ने के किसान FRP बढ़ोतरी में देरी को लेकर आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं
चीनी उद्योग के लिए गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने वाले रमेश चंद पैनल में किसानों के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति को लेकर गन्ने की खेती करने वाले किसान नाराज हैं। किसानों का मानना है कि FRP में वृद्धि की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की जा रही है।
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गन्ना उत्पादक किसानों ने गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (FRP) बढ़ाने में हुई देरी के खिलाफ विरोध दर्ज किया है। किसानों का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण मूल्य निर्धारण प्रक्रिया में उनके प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है, जिससे उनके हितों को नुकसान हो रहा है।
रमेश चंद की अध्यक्षता वाली समिति को चीनी उद्योग के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य तय करने का काम सौंपा गया है। हालांकि, किसान संगठनों का मत है कि इस पैनल में किसानों के हितों का प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है, जिससे उनकी आवाजें समिति तक नहीं पहुंच पा रही हैं।
कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों और किसान नेताओं के अनुसार, FRP में समय पर और उचित वृद्धि न होने से गन्ना उत्पादकों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। किसान इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी पक्षों की सहभागिता आवश्यक है।
यह विवाद कई राज्यों में गन्ना उत्पादकों के बीच भारी असंतोष का कारण बना हुआ है। किसान संगठन सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि वह समिति के ढांचे में तुरंत संशोधन करे और किसानों के वास्तविक प्रतिनिधियों को इसमें जगह दे।