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गन्ने की उचित कीमत के लिए किसान फिर सड़कों पर, हुब्बली की ओर पदयात्रा
चीनी और इथेनॉल उत्पादन में अपना न्यायसंगत हिस्सा पाने के लिए गन्ने के किसान पुनः आंदोलन में सक्रिय हो गए हैं। 'हुब्बली चलो' पदयात्रा के माध्यम से किसान लंबे समय से अनसुलझे मुद्दों को फिर से उठा रहे हैं।
LSN India ·

देश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसान संगठन एक बार फिर राजस्व साझेदारी को लेकर मुखर हो उठे हैं। 'हुब्बली चलो' नाम की इस पदयात्रा के जरिए वे चीनी मिलों और इथेनॉल उत्पादन में अपने हकदारी के मुद्दे को केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि गन्ने की कीमत निर्धारण में उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। जबकि चीनी और इथेनॉल का बाजार में उच्च मूल्य है, लेकिन इसका सीधा लाभ मूल उत्पादकों को नहीं मिलता। इस असमानता को दूर करने की मांग करते हुए किसान संगठन सरकार और उद्योग जगत का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं।
यह आंदोलन किसानों की सालों पुरानी शिकायतों को फिर से सामने लाता है। गन्ने की उपज में मेहनत करने वाले किसान यह मानते हैं कि मुनाफे में उनका योगदान कहीं अधिक है, लेकिन आय का वितरण असंतुलित है। पदयात्रा के दौरान किसान इन मूल मुद्दों को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
ऐसे प्रयास किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भेजते हैं कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखेंगे। सरकारी नीति निर्माताओं के लिए यह एक अवसर है कि वे कृषि क्षेत्र में राजस्व वितरण की प्रणाली को पुनर्विचार करें और किसानों के साथ न्यायसंगत समझौते का रास्ता तलाशें।