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चेर्नोबिल के बाद वैज्ञानिकों ने रेडियोधर्मी तत्वों को सोखने के लिए सूरजमुखी लगाए
चेर्नोबिल परमाणु दुर्घटना के बाद वैज्ञानिकों ने एक अभिनव तरीका अपनाया। उन्होंने सूरजमुखी के पौधों का उपयोग करके मिट्टी से रेडियोधर्मी समस्थानिकों को सोखने का प्रयास किया।
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चेर्नोबिल में हुई भीषण परमाणु दुर्घटना के बाद प्रदूषित क्षेत्र को शुद्ध करने के लिए वैज्ञानिकों ने अभूतपूर्व उपाय अपनाए। इसमें सूरजमुखी के पौधों का उपयोग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये पौधे मिट्टी और पानी से रेडियोधर्मी तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं।
इस जैविक सफाई प्रक्रिया को फाइटोरेमेडिएशन कहा जाता है। सूरजमुखी के अलावा अन्य पौधों का भी इस कार्य में प्रयोग किया गया। वैज्ञानिकों का मानना था कि ये पौधे प्रकृति के माध्यम से प्रदूषण को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
चेर्नोबिल दुर्घटना ने पर्यावरणीय संकट की भयावहता को उजागर किया। इसके बाद दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने रेडियोधर्मिता से प्रभावित क्षेत्रों को पुनः उपयोगी बनाने के तरीके तलाशने शुरू किए। पौधों के इस्तेमाल से कई प्रदूषित इलाकों में सुधार देखा गया।
यह विधि न केवल पर्यावरण के लिए प्रभावी साबित हुई, बल्कि खर्चीली प्रक्रियाओं के विकल्प के रूप में भी काम आई। अब तक इस तकनीक का उपयोग विश्व के विभिन्न देशों में परमाणु और औद्योगिक प्रदूषण से निपटने के लिए किया जा रहा है।