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नोएडा फ्लैट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व हाईकोर्ट जज को सौंपी जांच
तीस साल पुराने नोएडा हाउसिंग सोसाइटी विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को एकल सदस्यीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। समिति को आवास आवंटन संबंधी वास्तविक सदस्यों की पहचान और उनकी पात्रता निर्धारित करनी होगी।
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नोएडा में आवास आवंटन को लेकर तीन दशक से अधिक समय से चले आ रहे विवाद के समाधान के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को एकल सदस्यीय समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। इस समिति का दायित्व हाउसिंग सोसाइटी के वास्तविक सदस्यों की पहचान करना और फ्लैट आवंटन के लिए उनकी पात्रता का निर्धारण करना है।
यह कदम 2022 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उठाया गया है, जो इस विवाद को निपटाने के लिए था। हालांकि, तीन दशक पहले से चली आ रही जटिलताओं के कारण मामला अभी भी पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है। समिति को विभिन्न दावेदारों की दस्तावेजों और योग्यता की जांच करते हुए सच्ची सदस्यता निर्धारित करनी होगी।
इस नियुक्ति का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को गति देना और विवादास्पद फ्लैट आवंटन के मामलों का निष्पक्ष समाधान प्रदान करना है। पूर्व न्यायाधीश के पास इस तरह के मामलों में न्यायिक अनुभव होगा, जो निष्पक्ष निर्णय लेने में सहायक साबित होगा।
सोसाइटी के प्रभावित सदस्यों के लिए यह एक महत्वपूर्ण विकास है, जो लंबे समय से अपने हक और आवास संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट सभी विवादास्पद मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।