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सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के बीसी आरक्षण निर्णय को बरकरार रखा
सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को 'अत्यंत विवेकपूर्ण' बताया है। न्यायालय ने कहा कि 50 प्रतिशत की सीमा से आगे जाने के लिए कोई ठोस आंकड़े नहीं हैं।
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नई दिल्ली - सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के पिछड़े वर्ग (बीसी) आरक्षण संबंधी निर्णय को बरकरार रखा है। न्यायाधीश दिपंकर दत्ता और शील नागु की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश को 'अत्यंत विवेकपूर्ण' करार दिया।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत की संवैधानिक सीमा से अधिक आरक्षण देने के लिए कोई सशक्त आनुभविक आंकड़े या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे। न्यायालय के अनुसार, इस तरह के महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए ठोस तथ्य और डेटा होना आवश्यक है।
यह निर्णय आरक्षण नीति के संवैधानिक ढांचे को बनाए रखने के मामले में महत्वपूर्ण है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरक्षण संबंधी नीतियां तैयार करते समय सामाजिक और आर्थिक तथ्यों पर आधारित होना चाहिए।
यह मामला बीसी आरक्षण की सीमा और उसके विस्तार से संबंधित था। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय विभिन्न राज्यों में आरक्षण नीति के क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश साबित होगा।