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सर्वोच्च न्यायालय ने सदस्यता-आधारित यौन सामग्री होस्ट करने पर रोक लगाई
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों को सदस्यता के माध्यम से यौन सामग्री प्रदान करने से रोका है। न्यायालय का मानना है कि बच्चे कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद इंटरनेट का उपयोग जारी रखते हैं और अनियंत्रित प्लेटफार्मों की ओर रुख करते हैं।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में ऑनलाइन मंचों को सदस्यता-आधारित यौन सामग्री होस्ट करने पर प्रतिबंध लगाया है। न्यायालय का यह कदम बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।
न्यायालय के निर्णय में कहा गया है कि कानूनी प्रतिबंध के बावजूद बच्चे इंटरनेट का उपयोग करना बंद नहीं करते। इसके बजाय वे ऐसे अनियंत्रित और असुरक्षित प्लेटफार्मों की ओर रुख करते हैं जहां उन्हें कोई सुरक्षा उपाय नहीं मिलता। न्यायालय का मत है कि यह स्थिति बच्चों के लिए और भी अधिक जोखिमपूर्ण साबित होती है।
इस निर्णय से डिजिटल मंचों को कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला नाबालिगों के ऑनलाइन संरक्षण को लेकर कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।