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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा: एक ही मुकदमे में कई आजीवन सजाएं एक के बाद एक नहीं चल सकतीं
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि अलग-अलग अपराधों के लिए दी गई कई आजीवन सजाओं को क्रमिक रूप से चलाया नहीं जा सकता। न्यायालय के अनुसार, ऐसी सजाओं को एक दूसरे पर अध्यारोपित किया जाना चाहिए।
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सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक सजा में दी गई रिहाई या क्षमादान स्वतः ही दूसरी सजा पर लागू न हो जाए। न्यायालय ने कहा कि जब एक ही मुकदमे में कोई व्यक्ति कई अपराधों के लिए दोषी पाया जाता है और उसे आजीवन कारावास की सजा दी जाती है, तो इन सजाओं को अलग-अलग नहीं बल्कि एक-दूसरे के ऊपर चलाया जाना चाहिए। इस व्यवस्था से कानूनी प्रणाली में स्पष्टता और सुसंगतता आएगी। न्यायालय का यह निर्णय कारागार प्रशासन और कानूनी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि न्यायिक निर्णय का अभिप्राय सही तरीके से कार्यान्वित हो और कोई भी दोषी अनुचित लाभ न उठा सके।