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सर्वोच्च न्यायालय ने इस्लाम धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण देने पर रोक लगाई

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तमिलनाडु सरकार को धर्म परिवर्तन से पहले की स्थिति के आधार पर इस्लाम में परिवर्तित लोगों को आरक्षण देने से प्रतिबंधित किया गया था।

LSN India · 16 October 2026

सर्वोच्च न्यायालय ने इस्लाम धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण देने पर रोक लगाई

सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि तमिलनाडु सरकार उन व्यक्तियों को आरक्षण लाभ नहीं दे सकती जो इस्लाम धर्म में परिवर्तित हो गए हैं, भले ही वे पहले अनुसूचित जाति या जनजाति के सदस्य रहे हों। यह फैसला मद्रास उच्च न्यायालय के एक पूर्ववर्ती निर्णय की पुष्टि करता है।

आरक्षण नीति से संबंधित इस मामले में न्यायालय का दृष्टिकोण यह है कि धार्मिक समूहों को आरक्षण प्रदान करने के संबंध में विशेष कानूनी प्रावधान लागू होते हैं। अदालत ने माना कि राज्य सरकार की नीति में किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के बाद उनकी पूर्व सामाजिक स्थिति को आधार बनाकर आरक्षण देना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

यह निर्णय संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक कल्याण योजनाओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। अदालत ने तमिलनाडु राज्य की आरक्षण नीति की व्यापक समीक्षा की और माना कि धर्मांतरण के आधार पर पहचान परिवर्तित नहीं हो सकती जहां कानूनी अधिकारों का निर्धारण किया जाता है।

इस फैसले के निहितार्थ भारत के अन्य राज्यों में भी आरक्षण नीतियों पर बहस को प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर उन मामलों में जहां धर्मांतरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का प्रश्न जुड़ा हो।