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सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और ड्रग रेगुलेटर को झिड़का
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान दी गई अस्थायी मंजूरियों पर निर्भर रहने वाली दवा कंपनियों के खिलाफ नियामक कार्रवाई में देरी को लेकर असंतोष व्यक्त किया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि एंटीफंगल दवा की समाप्त मंजूरियों को वापस लेने में विफलता चिंताजनक है।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) पर कोविड-19 महामारी के दौरान दी गई अस्थायी स्वीकृतियों पर तीव्र कार्रवाई करने में विफलता को लेकर नाराजगी जताई है। न्यायालय ने कहा कि नियामक प्राधिकरण उन कंपनियों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई करने में विलंब कर रहे हैं जो समाप्त अस्थायी अनुमोदनों पर निर्भर रहकर एंटीफंगल दवाओं का निर्माण जारी रखे हुए हैं।
अदालत ने व्यक्त किया कि महामारी के दौरान आपातकालीन आधार पर दी गई इन अस्थायी मंजूरियां अब समाप्त हो चुकी हैं और इन पर अमल करना अनियमित है। सीडीएससीओ को यह दायित्व है कि वह ऐसी सभी कंपनियों को तुरंत नोटिस जारी करे और उन्हें दवाओं के विक्रय पर तत्काल प्रतिबंध लगाए।
न्यायालय ने कहा कि ऐसी लापरवाही से जनता के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और ड्रग रेगुलेटर को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में तीन सप्ताह के अंदर संपूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत करें।