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ईडब्ल्यूएस कोटा के क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल आयोग पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों के बेमेल कार्यान्वयन का आरोप लगाया है। न्यायालय जनवरी 13 के अपने आदेश की निगरानी कर रहा है जिसमें शिक्षा अधिकार कानून के तहत सख्त प्रवर्तन अनिवार्य किया गया था।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की आलोचना की है कि वह बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत कोटे को लागू करने में लापरवाही बरत रहा है।
न्यायालय ने जनवरी 13 को दिए गए अपने निर्देशों की निगरानी की प्रक्रिया जारी रखी है। उस आदेश में अधिनियम की धारा 12(1)(सी) के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी एनसीपीसीआर ने इस मामले में पर्याप्त गतिविधि प्रदर्शित नहीं की है।
इस कोटा प्रणाली का उद्देश्य है कि निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। हालांकि, क्षेत्रीय स्तर पर इसके कार्यान्वयन में गंभीर कमियां देखी जा रही हैं।
न्यायालय ने आयोग को अगली सुनवाई से पहले इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने से समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।