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लिंग निर्धारण मामलों में जांच का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने लिंग निर्धारण अधिनियम से संबंधित मामलों में पुलिस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण सवालों का जवाब दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर सकती है, जांच कर सकती है और मजिस्ट्रेट चार्जशीट के आधार पर संज्ञान ले सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने लिंग निर्धारण अधिनियम के तहत अपराधों की जांच और अभियोजन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण सवालों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। ये सवाल अक्सर न्यायिक प्रणाली में भ्रम पैदा करते रहे हैं।
पहले सवाल पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना कि पुलिस इस अधिनियम के तहत अपराधों के लिए प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का अधिकार रखती है। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है क्योंकि कई मामलों में पुलिस को इस बारे में संदेह रहता है कि क्या वह ऐसी रिपोर्ट दर्ज कर सकती है।
दूसरे प्रश्न का उत्तर देते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस बल के पास लिंग निर्धारण से जुड़े अपराधों की जांच करने की जिम्मेदारी है। यह जांच प्रक्रिया उन्हीं सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार संचालित होगी जो अन्य अपराधों में अपनाए जाते हैं।
तीसरे मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर मजिस्ट्रेट अपराध के संबंध में स्वतः संज्ञान ले सकते हैं। इस फैसले से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
अदालत के इस स्पष्ट निर्देश से लिंग निर्धारण अधिनियम के प्रवर्तन में एकरूपता आएगी और देश भर में कानून के शासन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।