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सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल को कोविड-काल के मामलों को वापस लेने की अनुमति दी
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश को महामारी के दौरान बैठे और पूर्व विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की अनुमति प्रदान की है। ये मामले पुतलों को जलाने और राजमार्गों पर धरना देने जैसे मामूली अपराधों से संबंधित थे।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान बैठे और पूर्व विधायकों के विरुद्ध दायर मामलों को वापस लेने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय के तहत सरकार उन सभी मामलों को撤回कर सकती है जो इस अवधि में छोटे-मोटे अपराधों से संबंधित थे।
ये मामले मुख्यतः सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन से जुड़े थे, जिनमें प्रतिकात्मक रूप से पुतलों को जलाना और राजमार्गों पर धरना देना शामिल था। ये सभी घटनाएं महामारी की अवधि में घटित हुई थीं, जब विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन होते रहे थे।
न्यायालय के इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश सरकार को इन मामलों में से कई को आपराधिक रिकॉर्ड से हटाने का अधिकार मिल गया है। राज्य अब इस व्यवस्था का लाभ उठाकर विधायकों से जुड़े इन पुरानी कानूनी कार्यवाहियों को औपचारिक रूप से समाप्त कर सकता है।
यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के उन प्रयासों का हिस्सा है जो राज्य सरकारों को महामारी की अवधि में हुई मामूली घटनाओं के संबंध में कानूनी कार्यवाहियां हल्के-फुल्के तरीके से निपटाने की सुविधा देता है।