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दिल्ली में दिवाली पर हरित पटाखों को मिली अनुमति, जानिए विशेषताएं
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण अनुकूल अगली पीढ़ी के जॉइंटेड ग्रीन पटाखों के निर्माण और विक्रय को मंजूरी दी है। ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में प्रदूषण काफी कम करते हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित नई पीढ़ी के पटाखे सख्त पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हैं। ये पटाखे पारंपरिक लड़ी वाले पटाखों से मूलतः अलग तकनीक पर आधारित हैं और कम रसायन का उपयोग करते हैं।
हरित पटाखों का निर्माण उन्नत तकनीक से किया जाता है जो वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों को कम करता है। पारंपरिक पटाखों की तुलना में ये लगभग आधा प्रदूषण उत्पन्न करते हैं। इन पटाखों में कम मात्रा में रसायनिक पदार्थ जैसे सल्फर और धातु के कण होते हैं।
इन पटाखों के निर्माण प्रक्रिया में अधिक सावधानी बरती जाती है। पर्यावरण सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें विशेष मानकों के तहत तैयार किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मानदंड सभी निर्माताओं के लिए अनिवार्य हैं।
हालांकि ये पटाखे अधिक पर्यावरण अनुकूल हैं, पर विशेषज्ञ सुझाते हैं कि दिवाली के दौरान पटाखों का उपयोग सीमित मात्रा में ही किया जाए। पटाखों के विस्फोट के समय और स्थान का भी प्रदूषण पर असर पड़ता है।