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सुप्रीम कोर्ट ने NSE-SEBI समझौते को मंजूरी दी, को-लोकेशन मामले में अपील खारिज
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा NSE के प्रस्तावों को स्वीकार किए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने निपटान को मंजूरी दी है। को-लोकेशन और डार्क फाइबर विवाद को हल करने के लिए NSE को लगभग 1,492 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
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राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के बीच को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामले में समझौता करने का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने प्रशस्त कर दिया है। अदालत ने इस समझौते को स्वीकार करते हुए संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया है।
SEBI द्वारा NSE के प्रस्तावों को स्वीकृति देने के साथ ही यह निपटान संभव हुआ है। इस समझौते के तहत NSE को को-लोकेशन सुविधा के उपयोग और डार्क फाइबर से संबंधित विवादों को समाप्त करने के लिए लगभग 1,492 करोड़ रुपये का भुगतान करना है।
को-लोकेशन सुविधा बाजार सहभागियों को स्टॉक एक्सचेंज के सर्वरों के करीब अपने कंप्यूटर रखने की अनुमति देती है। इससे संबंधित विवाद तकनीकी लाभ प्राप्त करने और बाजार में पारदर्शिता को लेकर उठाए गए थे।
यह निपटान लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को समाप्त करता है और NSE के साथ नियामकीय मामले को सुलझाने में एक महत्वपूर्ण कदम है। अदालत के इस निर्णय से भारतीय शेयर बाजार में विनियामकीय पारदर्शिता को और बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।