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रिश्ता खत्म होने के बाद सहमति से शारीरिक संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी सहमति से बने रिश्ते के टूटने के बाद शारीरिक संबंधों को बलात्कार का आरोप नहीं लगाया जा सकता। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में सहमति का प्रश्न महत्वपूर्ण है।
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भारतीय न्यायपालिका ने बलात्कार से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, जब दो वयस्क व्यक्तियों के बीच प्रारंभ में शारीरिक संबंध सहमति से बने होते हैं, तो बाद में रिश्ता खराब होने या टूटने की परिस्थिति में ऐसे संबंधों को बलात्कार का नाम नहीं दिया जा सकता।
न्यायालय के इस फैसले में कहा गया है कि बलात्कार के आरोप के लिए शारीरिक संबंध अनिच्छा से या किसी के विरोध के विरुद्ध होना चाहिए। यदि शुरुआत में संबंध पूरी सहमति से थे, तो बाद की परिस्थितियां इसे अपराध नहीं बना सकतीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिश्तों में होने वाले विवाद या मतभेद को आपराधिक मामले में बदलना उचित नहीं है।
यह फैसला विशेषकर उन मामलों में महत्वपूर्ण है जहां कोई पक्ष संबंध खत्म होने के बाद बलात्कार का आरोप लगाता है। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया है कि न्यायतंत्र को सहमति और अनिच्छा के बीच स्पष्ट अंतर समझना चाहिए। इस तरह के निर्णय से कानूनी प्रक्रिया में विवेक और न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।