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PMLA फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नई पीठ का गठन किया
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की बेंच 2022 के ऐतिहासिक प्रतिबंधी संपत्ति जब्ती कानून के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिकाओं पर विचार करेगी।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक नई संवैधानिक पीठ का गठन किया है जो 2022 के महत्वपूर्ण प्रतिबंधी संपत्ति जब्ती अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार करेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के नेतृत्व में यह तीन न्यायाधीशों की पीठ विभिन्न संवैधानिक मुद्दों की जांच करेगी।
2022 का यह निर्णय पीएमएलए के मूल प्रावधानों को बरकरार रखता है, विशेषकर प्रतिलोम साक्ष्य भार के सिद्धांत को। इस नियम के तहत संदिग्ध व्यक्ति को यह साबित करना होता है कि जब्त की गई संपत्ति वैध स्रोतों से अर्जित की गई है, न कि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि वह अवैध है।
पीठ को इस बात पर विचार करना होगा कि क्या ये प्रावधान भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों से संगत हैं। विभिन्न नागरिक अधिकार समूहों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस कानून के कुछ पहलुओं को संवैधानिक चिंताओं का विषय बताया है।
यह पुनरीक्षण याचिका प्रक्रिया काले धन और संदिग्ध संपत्ति के खिलाफ सरकार के कानूनी रुख को परिभाषित करने वाली एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई का प्रतिनिधित्व करती है। पीठ के निर्णय का देश की आर्थिक अपराध और संपत्ति जब्ती कानूनों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।