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इंटरनेट पहुंच मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण घोषणा
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में इंटरनेट एक्सेस को प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार घोषित किया है। संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत यह अधिकार बच्चों सहित सभी को प्राप्त है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में इंटरनेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21, जो जीवन के अधिकार की गारंटी देता है, और अनुच्छेद 19(1)(a), जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, के आधार पर दिया गया है।
कोर्ट के इस निर्णय का दायरा सभी व्यक्तियों तक विस्तृत है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं। डिजिटल युग में शिक्षा, सूचना और संचार के लिए इंटरनेट की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए यह फैसला आया है।
यह निर्णय भारत में डिजिटल अधिकारों के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। इंटरनेट को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने से देश के सभी नागरिकों, विशेषकर सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए डिजिटल समावेश सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
इस ऐतिहासिक घोषणा से भारत सरकार और नीति निर्माताओं पर सभी नागरिकों को समान रूप से इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सुनिश्चित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए और प्रयास होंगे।