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को-लोकेशन घोटाले में चित्रा राम कृष्णन की याचिका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की पूर्व प्रबंध निदेशक चित्रा राम कृष्णन की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने विचार करने से इंकार कर दिया। उनके वकील ने तर्क दिया कि एनएसई एक निजी कंपनी है और याचिकाकर्ता को सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन करने वाला नहीं माना जा सकता।
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को-लोकेशन घोटाले से संबंधित मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने चित्रा राम कृष्णन द्वारा दायर एक महत्वपूर्ण याचिका को स्वीकार करने से मना कर दिया है। उनके वकील बलबीर सिंह ने याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष अपने तर्क प्रस्तुत किए थे।
राम कृष्णन की याचिका उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती दे रही थी। इस संदर्भ में वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने तर्क दिया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज मूल रूप से एक निजी कंपनी है। उनका मानना था कि इस कारण याचिकाकर्ता के खिलाफ सार्वजनिक कर्तव्य के उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया जा सकता है।
चित्रा राम कृष्णन को को-लोकेशन सेवाओं से संबंधित अनियमितताओं में उनकी भूमिका को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। यह घोटाला वर्षों से भारतीय शेयर बाजार जगत में विवाद का विषय रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से राम कृष्णन को कानूनी रास्ते में एक बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय के आदेश को अब चुनौती देने का उनके पास कोई अन्य विकल्प शेष नहीं रह गया है।