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TMC विद्रोही सांसदों की अयोग्यता कार्यवाही में सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा तय नहीं की
सर्वोच्च न्यायालय ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला के लिए निर्धारित समय सीमा तय करने से परहेज किया। विद्रोही सांसदों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह की मांग को स्वीकार किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के विद्रोही सांसदों की अयोग्यता कार्यवाही से संबंधित मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की। न्यायालय ने इस बात को दर्ज किया कि विद्रोही सांसदों ने अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा है।
अदालत ने दोनों पक्षों की अपील के बाद इस निर्णय पर पहुंचा है। विद्रोही सांसदों की ओर से यह तर्क दिया गया कि उन्हें पर्याप्त समय की आवश्यकता है ताकि वे अपना पक्ष समुचित ढंग से प्रस्तुत कर सकें। सर्वोच्च न्यायालय ने इस अनुरोध को गंभीरता से लिया है।
यह मामला असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियों के बीच उजागर हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद पार्टी से अलग हुए थे, जिसके बाद अयोग्यता संबंधी कार्यवाही की जाने लगी थी।
न्यायालय ने आगामी सुनवाई के लिए कोई तारीख तय नहीं की है। सभी पक्षों को अपनी कानूनी बहस और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक समय दिया जाएगा। यह प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों के अनुसार संपन्न होगी।