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वंदे मातरम् के सभी पद न गाना अपराध नहीं: सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जो व्यक्ति सम्मानपूर्वक राष्ट्रगान के पूर्ण पाठ को गाने से इंकार करता है उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। न्यायालय ने अपने निर्णय में बिजोय इमैनुएल मामले का हवाला दिया।
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नई दिल्ली - भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रगान वंदे मातरम् के सभी पदों को गाना अनिवार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि कोई व्यक्ति यदि सम्मानपूर्वक इसे गाने से इंकार करता है तो उसे आपराधिक दंड का सामना नहीं करना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में बिजोय इमैनुएल के प्रसिद्ध मामले का संदर्भ दिया। इस ऐतिहासिक मामले में न्यायालय ने पहले ही माना था कि किसी को राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने का तरीका चुनने की स्वतंत्रता है।
न्यायालय का यह फैसला धार्मिक और व्यक्तिगत विश्वास की स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण पहलू को स्पष्ट करता है। न्यायाधीशों ने जोर देते हुए कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान को बनाए रखते हुए भी किसी की आस्था और चेतना की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।
यह निर्णय भारतीय संविधान द्वारा दी गई मूल अधिकारों के साथ सामंजस्य बनाता है, जहां धर्म और विवेक की स्वतंत्रता को मौलिक माना गया है। न्यायालय का यह पड़ाव संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय गरिमा दोनों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक संतुलित कदम है।