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ओबीसी क्रीमी लेयर नीति पर केंद्र की अपील पर सुप्रीम कोर्ट आदेश सुरक्षित
सर्वोच्च न्यायालय ने ओबीसी क्रीमी लेयर नीति को ठीक करने के लिए केंद्र सरकार को दो साल की अवधि देने की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार ने कहा है कि पूर्वव्यापी लागू करने से भर्ती, पदोन्नति और प्रवेश नियमों में गंभीर समस्याएं आ सकती हैं।
LSN India ·

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की क्रीमी लेयर नीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में केंद्र सरकार ने न्यायालय के एक पिछले निर्णय को लागू करने के लिए दो वर्ष की समयावधि मांगी है।
सरकार की ओर से दायर अपील में कहा गया है कि विवादास्पद निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने से सरकारी नौकरियों में भर्ती, सेवा आवंटन, कैडर प्रबंधन और वरिष्ठता संबंधी मामलों में व्यापक परिणाम होंगे। इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया और ओबीसी कोटा प्रशासन को लेकर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
न्यायालय का यह फैसला पूर्वव्यापी बनाम भविष्य के आधार पर निर्णय लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखता है। सरकार ने तर्क दिया है कि केवल आगामी नियुक्तियों और प्रवेश के लिए नई नीति लागू की जानी चाहिए।
क्रीमी लेयर की परिभाषा और ओबीसी आरक्षण नीति भारत में लंबे समय से विवादास्पद रही है। यह मामला सामाजिक न्याय और प्रशासनिक व्यवहार्यता के बीच संतुलन बनाने से संबंधित है। सर्वोच्च न्यायालय अपने आदेश में इन सभी पहलुओं पर विचार करेगा।