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सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई एमडीआर पर तत्काल रोक नहीं लगाई, सरकार से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति बागची ने इस शुल्क के कानूनी आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने के मामले में तत्काल स्थगन देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति भास्कर बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस विषय पर केंद्र सरकार से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या यह शुल्क एक कर है या कोई अन्य शुल्क है। साथ ही, यदि यह दोनों में से कोई नहीं है, तो इसे लागू करने का कानूनी आधार क्या है। न्यायालय ने यह भी जांचना चाहा कि आखिरकार किस सेवा के लिए यह राशि एकत्र की जा रही है।
यह सवाल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यूपीआई भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन गया है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर व्यापक विवाद चल रहा है कि यह छोटे व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को कैसे प्रभावित करेगा।
कोर्ट ने सरकार को पक्षकारों के तर्कों का विश्लेषण करते हुए एक व्यापक जवाब देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई में सरकार के जवाब के आधार पर ही इस मामले पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।