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दवा कंपनियों की अनैतिक विपणन पद्धतियों पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दवा उद्योग में अनैतिक विपणन प्रथाओं को नियंत्रित करने के लिए एक पैनल गठित करने का निर्देश दिया है। यह कदम महंगे उपहार, विदेश यात्रा और अन्य प्रलोभनों के माध्यम से डॉक्टरों को विशेष दवाएं निर्धारित करने के दबाव से संबंधित है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह दवा कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली अनैतिक विपणन प्रथाओं को नियंत्रित करने के लिए एक समिति का गठन करे। यह निर्णय एक याचिका के बाद आया है जिसमें फार्मास्यूटिकल उद्योग में व्याप्त कदाचार की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था।
याचिका में दवा निर्माताओं द्वारा अपनाई जाने वाली विभिन्न प्रथाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें डॉक्टरों को महंगे उपहार देना, विदेशी यात्रा के आमंत्रण देना और अन्य लाभ प्रदान करना शामिल है। इन तौर-तरीकों का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को अपनी दवाओं को लिखवाने के लिए प्रभावित करना है।
कोर्ट का मानना है कि ये उच्च दबाव वाली विपणन रणनीतियां न केवल चिकित्सा नैतिकता का उल्लंघन करती हैं बल्कि रोगियों के हित को भी नुकसान पहुंचाती हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इस प्रकार की प्रथाओं के कारण डॉक्टर अनावश्यक या महंगी दवाएं लिखते हैं, जिससे आम जनता का खर्च बढ़ता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय फार्मास्यूटिकल उद्योग में पारदर्शिता और नैतिकता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गठित पैनल को दवा कंपनियों की विपणन प्रथाओं पर नियंत्रण के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना होगा।