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तापीय बिजली संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एनजीटी से संपर्क करें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन प्रणाली स्थापित करने की समय सीमा बार-बार बढ़ाई गई है, जिससे प्रदूषण से जनता को स्वास्थ्य खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
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देश के तापीय विद्युत संयंत्रों में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी एनजीटी में अपनी शिकायत दर्ज करने का सुझाव दिया है ताकि इस मामले की गहराई से जांच की जा सके।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन यानी एफजीडी प्रणाली स्थापित करने के लिए निर्धारित समय सीमा को कई बार बढ़ाया गया है। इसके कारण तापीय विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले प्रदूषकों को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है।
वकील ने कोर्ट को बताया कि इन संयंत्रों से होने वाले प्रदूषण से आसपास के इलाकों में रहने वाली जनता को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एफजीडी प्रणाली सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले पर एनजीटी में विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है। पर्यावरण से संबंधित मामलों में एनजीटी को विशेष अधिकार हैं और वह इस तरह के मुद्दों पर जल्दी निर्णय ले सकता है।