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सर्वोच्च न्यायालय ने सात राज्यों को न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का निर्देश दिया
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर को सात सहमत राज्यों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने सेवा नियमों में संशोधन कर न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष करें।
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सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों को न्यायिक अनुभव को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में वृद्धि करने का निर्देश दिया है। इस निर्देश का पालन करने के लिए सात राज्यों ने पहले ही अपनी सहमति दे दी है।
यह निर्णय न्यायिक प्रणाली में अनुभवी न्यायाधीशों को अधिक समय तक कार्य करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। सेवानिवृत्ति की आयु में यह दो वर्ष की वृद्धि न्यायपालिका की कार्यकुशलता और प्रभावशीलता को बेहतर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी किए गए निर्देश सभी राज्यों के लिए बाध्यकारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेवानिवृत्ति की आयु में यह बढ़ोतरी न केवल अनुभवी न्यायाधीशों का ज्ञान बचाए रखने में मदद करेगी, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों को निपटाने में भी सहायता प्रदान करेगी।
इस कदम से न्यायपालिका को संस्थागत स्मृति और निरंतरता भी मिलेगी। साथ ही, युवा न्यायाधीशों के लिए अनुभवी वरिष्ठों के साथ काम करने का अवसर मिलता रहेगा, जो उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देगा।