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सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की
सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने माना कि भाषा से संबंधित सुधार प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन हैं और न्यायिक आदेशों के माध्यम से लागू नहीं किए जा सकते। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीशों जयमल्य बागची एवं वी मोहना की खंडपीठ ने यह निर्णय दिया।
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शीर्ष अदालत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाने की जांच के लिए एक पैनल गठित करने संबंधी जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायाधीश जयमल्य बागची और न्यायाधीश वी मोहना की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह निर्णय दिया।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भाषा से जुड़े सुधार पहले से ही प्रशासनिक स्तर पर विचार में हैं। न्यायालय के अनुसार, इस तरह के परिवर्तन न्यायिक आदेशों के माध्यम से नहीं किए जा सकते और इनके लिए प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि भाषा नीति से संबंधित निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लिए जाते हैं। खंडपीठ ने माना कि हालांकि अदालत में भाषा की बहुलता महत्वपूर्ण है, लेकिन संवैधानिक और प्रशासनिक दायरे के भीतर इसे संभव बनाने के लिए उचित चैनलों का पालन आवश्यक है।
यह निर्णय उन प्रयासों के बीच आता है जहां विभिन्न पक्षों ने भारतीय न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ाने की मांग की है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले कई मौकों पर कहा है कि वह स्थानीय भाषाओं में कार्यवाही को प्रोत्साहित करता है, लेकिन ऐसे परिवर्तनों को क्रमिक रूप से लागू किया जाना चाहिए।