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चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट विभाजित
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को लेकर केंद्र की याचिका पर विभाजित फैसला सुनाया। न्यायाधीशों की राय में मतभेद के कारण मामला बड़ी पीठ के पास जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में बनाए गए चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संदर्भ पर विभाजित निर्णय दिया है। अदालत की दोनों पीठों के बीच राय में मतभेद दिखा, जिससे इस महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न का अंतिम निर्धारण संदिग्ध रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से दाखिल याचिका में यह तर्क दिया गया था कि नए कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। मामले में राय विभाजित होने से अब सवाल उठ गया है कि क्या यह मुद्दा पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को भेजा जाएगा।
इस कानून में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को काफी हद तक सीमित किया गया है, जिस पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। विरोधियों का कहना है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में स्वतंत्रता और पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
कानूनी विश्लेषकों के अनुसार, इस मामले का फैसला भारतीय चुनाव आयोग की स्वायत्तता और संवैधानिक मूल्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बड़ी पीठ के गठन से पहले सभी पक्षों की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।