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हिरासत में मौत के मामले में सीबीआई को तीन महीने की अतिरिक्त समय सीमा
सर्वोच्च न्यायालय ने हिरासत में हुई मौत से जुड़ी जांच को पूरा करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो को तीन महीने की अतिरिक्त अवधि प्रदान की है। अदालत ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमित आपराधिक मामला दर्ज करने का भी निर्देश दिया है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हिरासत में हुई मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अपनी जांच पूरी करने के लिए तीन महीने की अतिरिक्त समय सीमा दी है। यह विस्तार अदालत की ओर से उस मामले की गंभीरता को स्वीकार करता है जहां एक व्यक्ति पुलिस हिरासत में मारा गया था।
अदालत के निर्देशों में सीबीआई निदेशक को मृतक की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमित आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए कहा गया है। इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच का समुचित निष्कर्ष निकाला जाए और अपराधों के लिए जवाबदेही स्थापित की जाए।
हिरासत में मौत के मामले देश में अत्यंत संवेदनशील होते हैं और न्यायपालिका ऐसे मामलों में कड़ी निगरानी रखती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अदालत प्रक्रिया के दौरान पूर्ण जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
इस मामले में अदालत की सक्रिय भूमिका मानवाधिकार सुरक्षा और न्यायिक निरीक्षण के प्रति उच्चतम न्यायालय की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। अगली सुनवाई में निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।