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जातिगत भेदभाव और रैगिंग नियमों पर यूजीसी के नियमों की समीक्षा के लिए सरकार को अतिरिक्त समय
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के जातिगत भेदभाव और छात्र उत्पीड़न से संबंधित नियमों की समीक्षा करने के लिए अधिक समय प्रदान किया है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मौजूदा नियमों की व्यापक समीक्षा के लिए अतिरिक्त समय दिया है। ये नियम जातिगत भेदभाव और रैगिंग की घटनाओं से निपटने के लिए तैयार किए गए हैं।
अदालत ने माना है कि इस संवेदनशील विषय पर सरकार को पर्याप्त समय की आवश्यकता है ताकि प्रभावी नीतियां बनाई जा सकें। उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव और रैगिंग की समस्या देश में एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही इस मुद्दे पर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय का मानना है कि यूजीसी को अपने नियमों में और सख्ती लानी चाहिए और विश्वविद्यालयों में इसके कार्यान्वयन की निगरानी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इस मामले में सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, कई राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर जातिगत भेदभाव और रैगिंग से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं। अदालत अगली सुनवाई में इस संबंध में की गई प्रगति की समीक्षा करेगी।