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सर्वोच्च न्यायालय ने NCLT पर मंत्रालय के प्रभुत्व का उठाया मुद्दा
सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) के संचालन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने NCLT और NCLAT के अध्यक्षों को चार सप्ताह के भीतर बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं संबंधी प्रस्ताव जमा करने का निर्देश दिया है।
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सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने NCLT के कामकाज पर केंद्रीय मंत्रालय के अत्यधिक प्रभाव पर चिंता जताई है। न्यायालय ने कहा कि न्यायाधिकरण अपनी स्वतंत्रता खो चुका है और पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में आ गया है।
न्यायाधीशों की खंडपीठ ने NCLT और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के अध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे चार सप्ताह की अवधि में अपनी बुनियादी ढांचागत जरूरतों, कर्मचारियों की संख्या और प्रशासनिक आवश्यकताओं के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करें।
न्यायालय का मानना है कि इन प्रस्तावों से न्यायाधिकरणों की स्वायत्तता और कार्यक्षमता में सुधार लाया जा सकेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने NCLT की स्वतंत्र कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया है।
यह निर्देश कंपनी कानून से संबंधित मामलों के तीव्र और निष्पक्ष निपटान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। NCLT देश के व्यावसायिक और कॉर्पोरेट विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।