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दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त नज़र
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं के एमआरपी और खुदरा विक्रेताओं को मिलने वाली कीमत के बीच बड़े अंतर पर चिंता जताई है। कोर्ट का मानना है कि यह प्रणाली दवा निर्माताओं के पक्ष में काम कर रही है।
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भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों में आश्चर्यजनक अंतर पर सवाल उठाया है। अदालत की खंडपीठ ने जानना चाहा कि क्यों दवा उद्योग की मौजूदा मूल्य निर्धारण व्यवस्था निर्माताओं के लिए अत्यधिक अनुकूल दिख रही है। कोर्ट के अनुसार, दवाओं का निर्धारित खुदरा मूल्य और वास्तविक खरीद मूल्य के बीच का अंतर उपभोक्ताओं के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया है कि सरकार इस तरह की प्रथाओं को बिना किसी जांच के जारी रखने की अनुमति क्यों दे रही है। सुप्रीम कोर्ट का मत है कि मौजूदा नीति में पारदर्शिता की कमी है और इससे आम जनता को नुकसान हो रहा है। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि दवाओं के क्षेत्र में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम होने चाहिए।
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया दवा उद्योग में मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता को दर्शाती है। अदालत ने संकेत दिया है कि वह इस विषय पर गहन समीक्षा कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट की इस कार्रवाई से दवाओं की कीमतों में सुधार आ सकता है और उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।