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सर्वोच्च न्यायालय ने दो बच्चों के मानदंड पर फिर से विचार की मांग की
भारत की गिरती जन्म दर को लेकर चिंता जताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने मौजूदा नीतियों की समीक्षा करने का आह्वान किया है। न्यायालय ने जनसंख्या वृद्धि दर में गिरावट और बढ़ती उम्रदराज आबादी के दीर्घकालीन परिणामों पर ध्यान दिलाया है।
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भारत की जनसंख्या नीति को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए दो बच्चों के नियम पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई है। न्यायालय ने देश की प्रजनन दर में तेजी से आई गिरावट को रेखांकित किया है, जो 2024 में घटकर 1.9 रह गई है।
यह आंकड़ा जनसंख्या नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि प्रतिस्थापन दर माने जाने वाले 2.1 से भारत की प्रजनन दर काफी नीचे आ गई है। न्यायालय ने इस ओर ध्यान दिलाया है कि जनसंख्या वृद्धि की गति में यह परिवर्तन देश के लिए दीर्घकालीन चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
न्यायालय की टिप्पणी वृद्ध जनसंख्या बढ़ने से जुड़ी समस्याओं पर केंद्रित है। बुजुर्ग आबादी में वृद्धि के चलते सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पेंशन व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में दबाव बढ़ने की आशंका है।
सर्वोच्च न्यायालय की यह टिप्पणी भारत की जनसांख्यिकीय गतिविधियों में बदलाव को दर्शाती है। शहरीकरण, महिलाओं की शिक्षा में वृद्धि और परिवार नियोजन जागरूकता के कारण प्रजनन दर में यह गिरावट देखी जा रही है। न्यायालय की समीक्षा की मांग से नीति निर्माताओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संकेत मिलता है।