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दवाओं की कीमतों में दसगुनी बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों में असामान्य वृद्धि को लेकर सरकार से सवाल उठाए हैं। न्यायालय ने पूछा कि इतनी बड़ी कीमत में इजाफे के पीछे क्या कारण है और इससे किसे लाभ मिल रहा है।
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नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दवाओं की कीमतों में दसगुनी वृद्धि पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय का यह अवलोकन फार्मास्यूटिकल सेक्टर में मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता को लेकर बढ़ती चिंताओं को रेखांकित करता है।
जस्टिस मेहता की अगुवाई वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से सीधे सवाल किया कि दवाओं की कीमतों में इतनी बड़ी छलांग क्यों आई है और इस बढ़ोतरी का लाभ किन्हें मिल रहा है। न्यायालय के सवाल दवा उद्योग के मार्जिन, खर्च संरचना और मूल्य निर्धारण तंत्र की जांच की ओर इशारा करते हैं।
न्यायालय ने एक परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि कोई फार्मासिस्ट दवा को 2,700 रुपये में देने के लिए सहमत हो जाता है, तो रोगियों में संदेह की स्थिति बन सकती है कि दवा वास्तविक है या नकली। इससे बाजार में विश्वास की समस्या उजागर होती है।
सुप्रीम कोर्ट की यह हस्तक्षेप दवा क्षेत्र में नियामकीय निरीक्षण को कड़ा करने की आवश्यकता को दर्शाता है। न्यायालय के प्रश्न सरकार से दवा मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हैं ताकि आम नागरिकों को सस्ती और मूलगुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकें।