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वंदे मातरम पर सुप्रीम कोर्ट में तनाव, सॉलिसिटर जनरल ने नक्सल टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट में वंदे मातरम गान न गाने पर दंडात्मक प्रावधानों को लेकर तीखी बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विधि निर्माण पर नक्सली टिप्पणी की।
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नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रगान वंदे मातरम को लेकर तनाव भरी बहस हुई जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विधि निर्माण के संदर्भ में नक्सली शब्द का प्रयोग किया। यह टिप्पणी तब की गई जब संगीतकार टीएम कृष्ण की ओर से पेश हुए वकील एस मुरलीधर ने गान न गाने पर दंडात्मक प्रावधानों के विरुद्ध तर्क दिए।
अदालत में होने वाली इस बहस में विभिन्न पक्षों के बीच मतभेद स्पष्ट हुए। एक ओर जहां सरकारी पक्ष राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विवेक की बात उठाई जा रही है।
टीएम कृष्ण का मामला धार्मिक और राजनीतिक कारणों से वंदे मातरम गान न गाने से जुड़ा है। इस मुद्दे पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को लेकर अदालत में विस्तृत विचार-विमर्श चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका नागरिक अधिकारों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के बीच संतुलन स्थापित करने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण निर्णय की संभावना रखती है। अदालत इन दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपना निर्णय देगी।