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पॉक्सो कानून के दुरुपयोग से बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि पारिवारिक विवादों में पॉक्सो अधिनियम के तहत गिरफ्तारी से पहले पुलिस को अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। विवाहित जोड़ों के बीच संरक्षकता के मामलों में इन कानूनी सुरक्षाओं का पालन अत्यावश्यक है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन उत्पीड़न से संबंधित मामलों में पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। न्यायालय के अनुसार, जब माता-पिता या परिवार के सदस्यों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की जाती है और साथ ही उन माता-पिता के बीच विवाह संबंधी विवाद भी मौजूद हो, तो पुलिस को गिरफ्तारी करने से पहले अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए।
न्यायालय की चिंता यह है कि कुछ मामलों में, विवाह विच्छेद या बाल संरक्षकता के विवादों में पॉक्सो अधिनियम का दुरुपयोग किया जा रहा है। ऐसे परिस्थितियों में, जहां परिवार के सदस्यों के बीच विद्यमान विवाद हो, वहां पुलिस को तत्काल गिरफ्तारी से बचना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य बाल संरक्षण कानूनों की गंभीरता को कम करना नहीं है। इसके बजाय, ये उपाय यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि जहां वैध पारिवारिक विवाद मौजूद हैं, वहां पॉक्सो अधिनियम का गलत उपयोग न हो सके।
पुलिस को अब ऐसे मामलों में तहकीकात करते समय अधिक सावधानी बरतनी होगी और सभी सबूतों का सत्यापन करना होगा। न्यायालय के इन निर्देशों से पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करते हुए झूठी शिकायतों से भी बचाव मिलने की उम्मीद है।