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श्रम कानून की सुरक्षा को खतरा: न्यायमूर्ति नागरत्नम की चेतावनी
भारतीय न्यायालय में श्रम कानून की व्याख्या पर बहस के बीच न्यायमूर्ति नागरत्नम ने चेतावनी दी है कि 'उद्योग' की परिभाषा को संकीर्ण करने से कर्मचारियों के कल्याण के मौजूदा सुरक्षा तंत्र को नुकसान हो सकता है।
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न्यायमूर्ति नागरत्नम ने एक महत्वपूर्ण असहमति में कहा है कि 1978 के ऐतिहासिक फैसले में 'उद्योग' की व्यापक परिभाषा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक है। इस परिभाषा को कमजोर करने से वर्षों से विकसित श्रम कल्याण सुरक्षा का ढांचा टूट सकता है।
न्यायमूर्ति के अनुसार, मौजूदा कानूनी व्यवस्था कर्मचारियों को बड़े निगमों के असंतुलित सौदेबाजी की शक्ति से बचाती है। 'उद्योग' की विस्तृत व्याख्या यह सुनिश्चित करती है कि विभिन्न प्रकार के कार्य क्षेत्रों में कार्यरत मजदूरों को समान संरक्षण प्राप्त हो।
श्रम कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भारत के औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों के अधिकारों की परिभाषा के लिए मौलिक है। कोर्ट के फैसले से न केवल वर्तमान कानूनी स्थिति प्रभावित होगी बल्कि भविष्य के श्रम विधान पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
इस मुद्दे को लेकर न्यायिक मंचों में विभिन्न दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं, लेकिन न्यायमूर्ति नागरत्नम का रुख श्रमिकों के मौजूदा कानूनी सुरक्षा को बनाए रखने की ओर है। उनके अनुसार, कानूनी संरक्षण को कमजोर करने से भारत के लाखों श्रमिकों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।