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सुप्रीम कोर्ट के 'चाचाजी' न्यायमूर्ति संजय करोल सेवानिवृत्त
हिमाचल प्रदेश के गरली गांव से आने वाले न्यायमूर्ति संजय करोल अपनी सरल और सुलभ कार्यशैली के लिए विख्यात रहे। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
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भारतीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय करोल अपनी सेवानिवृत्ति की घोषणा कर चुके हैं। करोल को न्यायालय के भीतर 'चाचाजी' के नाम से जाना जाता था, जो उनके मिलनसार और आत्मीय व्यक्तित्व का प्रतीक है।
हिमाचल प्रदेश के गरली गांव से संबंधित न्यायमूर्ति करोल अपनी सरल जीवनशैली और सहज दृष्टिकोण के लिए न्यायिक जगत में सम्मानित रहे। उनका यह स्वभाव उन्हें वकीलों, अधिकारियों और आम लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय बनाता था।
न्यायमूर्ति करोल की न्यायपालिका में सेवा कई महत्वपूर्ण निर्णयों और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ी रही है। उनके कार्यकाल में उन्होंने न्यायिक प्रणाली को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया।
गरली गांव, जिसे हिमाचल प्रदेश का पहला विरासत गांव माना जाता है, से आने के बावजूद न्यायमूर्ति करोल देशव्यापी सम्मान अर्जित करने में सफल रहे। उनकी सेवानिवृत्ति भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव चिह्नित करती है।