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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीसीआई के पास कानून छात्रों को दंडित करने की शक्ति नहीं है
सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि भारतीय बार काउंसिल (बीसीआई) के पास विधि छात्रों को अनुशासित करने की कोई शक्ति नहीं है। न्यायालय ने माना कि बीसीआई के पत्र छात्रों की अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय में कहा गया है कि भारतीय बार काउंसिल (बीसीआई) के पास कानून विद्यार्थियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की संवैधानिक शक्ति नहीं है। अदालत ने माना कि बीसीआई द्वारा जारी किए गए पत्र न्यायालय में प्रस्तुत याचिका के अनुसार, छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन की स्वतंत्रता पर एक दबाव का सृजन कर रहे हैं।
याचिका में तर्क दिया गया था कि बीसीआई के पत्राचार से विद्यार्थियों के बुनियादी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इन पत्रों के माध्यम से छात्रों को अपनी राय व्यक्त करने और शांतिपूर्ण तरीके से एकजुट होने से हतोत्साहित किया जा रहा था।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बीसीआई एक विनियामक निकाय है जो वकीलों के पेशेवर मानकों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। अदालत ने निर्देश दिया कि अनुशासनात्मक मामलों में बार काउंसिल की भूमिका सीमित होनी चाहिए और यह छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण नहीं कर सकती।
यह निर्णय शिक्षण संस्थानों में छात्र आंदोलनों और उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है। अदालत का यह निर्णय बताता है कि विनियामक निकायों को अपनी शक्तियों का प्रयोग करते समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सम्मान करना अनिवार्य है।