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सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक प्रभाव का मंच नहीं: 200 वकीलों का विरोध
भारत के शीर्ष अदालत के प्रांगण में राजनीतिक मार्च को लेकर देश भर के 200 वकीलों ने अपना आपत्ति दर्ज किया है। वकीलों का मानना है कि यह कार्रवाई न्यायालय की गरिमा को नुकसान पहुंचाती है।
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भारतीय बार एसोसिएशन (एससीबीए) को लिखे पत्र में 200 से अधिक वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के परिसर में हाल ही में किए गए राजनीतिक मार्च पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। ये वकील मानते हैं कि ऐसी कार्रवाही न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निरपेक्षता को प्रभावित करती है। इस मार्च को राजनीतिक प्रभाव और संख्यात्मक शक्ति का प्रदर्शन बताया गया है।
वकीलों ने अपने पत्र में एससीबीए के सचिव और कार्यकारी समिति को संबोधित करते हुए चिंता व्यक्त की है कि सर्वोच्च न्यायालय जैसी संस्था को किसी भी प्रकार के राजनीतिक कार्यकलाप का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह परिपाटी न्यायालय की गरिमा और स्वायत्तता को चोट पहुंचाती है।
यह विरोध न्यायिक संस्थान में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है। वकीली समुदाय का मत है कि अदालत को पूरी तरह से राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए ताकि न्याय प्रणाली पर जनता का विश्वास बना रहे।
इस मामले पर एससीबीए की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि, न्यायपालिका की निरपेक्षता को लेकर वकीलों का यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायालय की स्वतंत्र भूमिका को सुनिश्चित करने का दायित्व वहन करते हैं।