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सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले, लेकिन राजनेताओं से मिलने का अधिकार नहीं: मुख्य न्यायाधीश
भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी राजनीतिक नेताओं से मिलने का अधिकार रखता है।
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बुधवार को स्पष्ट किया कि न्यायालय के परिसर में सार्वजनिक पहुंच की नीति को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अदालत के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं, लेकिन यह सुविधा किसी को न्यायाधीशों या राजनीतिक हस्तियों से मिलने का अधिकार नहीं देती है।
मुख्य न्यायाधीश ने जोर देते हुए कहा कि न्यायालय परिसर में खुली पहुंच का मतलब केवल यह है कि नागरिक अपने कानूनी कार्यों के संबंध में यहां आ सकते हैं। इसमें लॉबिंग या राजनीतिक उद्देश्यों से भेंट करना शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए ऐसे नियम आवश्यक हैं।
यह टिप्पणी इस बात को लेकर की गई है कि कुछ लोग न्यायालय परिसर में राजनीतिक गतिविधियों और अनुचित मुलाकातों के लिए पहुंच का प्रयास कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अदालत ने जनता की पारदर्शिता और न्याय तक पहुंच के अधिकार को मान्यता देते हुए भी यह स्पष्ट किया है कि परिसर में सार्वजनिक पहुंच की सुविधा का दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कठोर नियम और निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।