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धर्मस्थल के 2012 बलात्कार-हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई जांच का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के धर्मस्थल में 2012 की एक भीषण बलात्कार और हत्या के मामले में नई जांच का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच तीन महीने में पूरी की जानी चाहिए और संबंधित अदालत में प्रस्तुत की जानी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने माना कि समाज को इस तरह के घृणास्पद अपराध की पीड़ित को न्याय दिलाने का दायित्व है। अदालत ने कहा कि यह दायित्व केवल तभी पूरा हो सकता है जब उचित तरीके से जांच की जाए और असली अपराधियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
खंडपीठ ने प्रकरण की गंभीरता को स्वीकार करते हुए जांच के लिए एक सख्त समय सीमा निर्धारित की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि जांच एजेंसियों को तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी और सबूतों के साथ संबंधित अदालत के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
यह आदेश पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पूरे देश में एक संदेश जाता है कि न्यायपालिका ऐसे गंभीर अपराधों के मामले में सतर्क रहेगी और न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
यह निर्णय कानून के शासन और पीड़ितों के अधिकारों के प्रति सुप्रीम कोर्ट की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अदालत का मानना है कि प्रभावी जांच और समय पर न्याय ही इस तरह के मामलों में विश्वास को बहाल करने का तरीका है।