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सर्वोच्च न्यायालय: विधानसभा का शेष कार्यकाल दलबदलु याचिकाओं में देरी का कारण नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दलबदलु विरोधी कानून के तहत याचिकाओं पर तेजी से सुनवाई होनी चाहिए। अदालत ने हाईकोर्ट्स को सीधे निर्देश देने से रोकने के लिए विधानसभा का शेष कार्यकाल पर्याप्त कारण नहीं माना।
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि दलबदलु विरोधी कानून से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विधानसभा के शेष कार्यकाल को आधार बनाकर हाईकोर्ट्स को निर्देश देने से नहीं रोका जा सकता है।
न्यायमूर्तियों की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि ऐसी याचिकाओं का निपटारा समय-सीमा के साथ किया जाना आवश्यक है। कोर्ट का मानना है कि सदन के विघटन की आसन्न संभावना याचिकाओं को लंबित रखने का न्यायसंगत कारण नहीं बन सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश विधानसभाओं में अक्सर देखे जाने वाले दलबदलु मामलों में कानूनी प्रक्रिया को गति देने के लिए दिया गया है। इस फैसले से सभी हाईकोर्ट्स को ऐसी याचिकाओं में त्वरित निर्णय लेने का संदेश मिला है।
दलबदलु विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत विधायकों द्वारा दल परिवर्तन की याचिकाओं में अक्सर स्पीकर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ऐसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और तेजी लाने का प्रयास है।